Friday, April 3, 2009

गुडिया के लिए

" पापा जल्दी आना "
गुडिया कहती है -
कभी उसकी आँखें देखूं
असीम आशाएं
कभी उसका भविष्य
और चला जाता हूँ-
उससे दूर
उसके पास आने को
बार बार आने को ।
पर उसकी आँखें येही कहती हैं -
पापा अब तो आपके बगैर
रहने की आदत हो गई है... ।

आँखें

तुम्हारी आँखें सिर्फ़ खुबसूरत
ही नही बल्कि एक वजह
है किसी के जीने की।
ये दीये हैं किसी की दुनिया
को रौशन करने के लिए ।
इसकी रौशनी कभी मधिम नही होगी
क्यों की ,
रौशनी तो आशा है ।

घास

धरती पर उगी घास
विराट खडे युग्लिप्तास की
अपेक्षा अधिक शाश्क्त है।
क्यों की
उसको आंधी का डर
पानी का भय
और पतझर से क्षय
नही होता।

अशेष

कल रात ,
चली थी नदी में
एक अकेली नाव ।
अकेली अर्थात
कुछ नही शेष
ढोने को
सिवाए रोने को... ।

आस

पंख फढ़फढ़अते
आसमान मैं पंछियों ने
जाने क्या कहा
मैंने भी अपने हाथ हिला दिए ।
जाने ये इशारा क्या था...
पास आने का
या
दूर जाने का ।